NPR क्या है ? और NPR, NRC से कैसे अलग है ? Everything about NPR

    NPR

    केंद्र सरकार ने हाल ही में 2021 जनगणना और NPR के लिए लगभग 13000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। हम सबको पता है कि जनगणना क्या है और क्यूँ इसे हर दस साल के अंतराल पर किया जाता  है। लेकिन NPR के बारे सही जानकारी ज़्यादा लोगों को उपलब्ध नहीं है। यहाँ पर हम NPR के बारे में जानेंगे साथ ये कैसे NRC से अलग है।

    क्या है NPR ?

    नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर यानी कि NPR एक जनसंख्या रजिस्टर है। गृह मंत्रालय के अनुसार नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर, “यूज़ूअल रेज़िडेंट ऑफ़ द कंट्री” या सामान्य रूप से देश ने रहने वाले, लोगों का रजिस्टर है। यूज़ूअल रेज़िडेंट का मतलब ऐसे लोगों से है जो भारत में कम से कम छः महीने से रह रहे हों या आगे छः महीने या उससे ज़्यादा रहना चाहता हो। यूज़ूअल रेज़िडेंट में भारतीय के साथ साथ भारत में रहने वाले  विदेशी नागरिकों को भी लिया जाता है। NPR में रजिस्ट्रेशन करना असम राज्य के लोगों को छोड़कर सभी के लिए अनिवार्य होगा, क्यूँकि असम में हाल ही में NRC प्रॉसेस खतम हुआ है। NPR अपडेट करने का उद्देस्य एक ऐसा डेटाबेस तैयार करने से है जिससे भारत में रहने वाले सभी लोगों की पहचान की जा सके।

    कब से शुरू हुआ NPR?

    NPR बनाने की शुरूवात नागरिकता क़ानून 1955 और सिटिज़नशिप (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिज़न्स एंड इश्यू ऑफ नेशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) रूल्स, 2003 के प्रावधानों के तहत हुई थी। देश में पहला NPR 2010 में बना था और 2015 में इसे आधार नम्बर के साथ अपडेट किया गया था। अब इसे अप्रेल से सितम्बर 2020 में कुछ अधिक जानकारियों के साथ फिर से अपडेट किया जाएगा। कई लोगों का मानना है की NPR, NRC लागू करने का पहला चरण है।

    NPR के लिए किन डॉक्युमेंट्स की ज़रूरत पड़ेगी?

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार NPR के लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह के डॉक्युमेंट्स पेश करने की कोई ज़रूरत नहीं होगी और ना ही किसी भी तरह के बायोमेट्रिक डेटा को लिया जाएगा। लोगों से  सेल्फ़ अटेस्ट हुई जानकारी को ही सही मानकर उसे NPR में दर्ज किया जाएगा।

    क्या जानकारी माँगी जाएगी NPR के लिए ?

    पिछले NPR से इस बार होने वाले अपडेट में कई जानकारियाँ और ली जाएँगी जो कि निम्न है –

    • नाम
    • घर के मुखिया के साथ सम्बन्ध
    • माता और पिता का नाम
    • लिंग
    • जन्मतिथि
    • वैवाहिक स्थिति
    • जीवनसाथी का नाम (यदि विवाहित हैं तो)
    • जन्मस्थान
    • नागरिकता (जो भी घोषित की हो)
    • सामान्य निवास का वर्तमान पता
    • वर्तमान पते पर रहने की अवधि
    • स्थायी निवास पता
    • व्यवसाय
    • शैक्षणिक योग्यता
    2020 में ली जाने वाली अतिरिक्त जानकारियां 
    • आधार नंबर (वैकल्पिक)
    • मोबाइल नंबर
    • अभिभावक का जन्मस्थान और तिथि
    • अंतिम निवास का पता
    • पासपोर्ट नंबर (यदि भारतीय पासपोर्ट धारक हैं तो)
    • वोटर आईडी कार्ड नंबर
    • पैन नंबर
    • ड्राइविंग लाइसेंस नंबर

    जनगणना और NPR  में क्या अंतर  है ?

    जनगणना प्रत्येक दस वर्ष पर की जाने वाली प्रक्रिया है। जनगणना में सिर्फ नागरिकों संख्या नही ली जाती बल्कि और भी बहुत सी जानकारियां एकत्रित की जाती हैं। NPR जनगणना के साथ ही शुरू होता है लेकिन इसे बीच में भी अपडेट कर सकते हैं और इसका डेटा जनगणना के डेटा से अलग होता है| NPR में सिर्फ जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाती है लेकिन जनगणना में जनसांख्यिकी, आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, लिंग और साक्षरता, जनसंख्या घनत्व, खेती, आवास और घरेलू सुविधाओं के अलावा अन्य पर भी जानकारी एकत्रित की जाती है। जनगणना में प्राप्त विस्तृत और प्रामाणिक जानकरी से पिछले एक दशक में देश की प्रगति की समीक्षा की जाती है , सरकार की चल रही योजनाओं की निगरानी की जाती है और भविष्य की योजनायें बनाने के प्रमुख आधार मिलाता है|

    जबकि NPR सिर्फ एक आयाम, जनसांख्यिकीय आधारित जानकारी, को ही कवर करता है| कम शब्दों में कहें तो NPR जनगणना का ही एक छोटा भाग है| प्रथम जनगणना सन 1872 में हुई थी| इस बार होने वाली जनगणना 16वीं जनगणना और आज़ादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी|

    NPR और NRC में क्या अंतर है ?

    मूलतः दोनों ही काफी अलग हैं लेकिन नाम मिलता जुलता होने के कारण दोनों के अर्थ में भ्रम की स्थिति है| आइये समझाते हैं NPR और NRC में मूल अंतर क्या है जो आपको पता होना चाहिए –

    • NPR में भारत के किसी भी इलाक़े में पिछले छह महीने से रह रहे भारतीय या विदेशी व्यक्ति के लिए है जबकि NRC सिर्फ भारतीय नागरिको के लिए है चाहे वो भारत में रह रहें हो या भारत से बाहर|
    • NPR के लिए किसी भी तरह के डॉक्यूमेंट या बायोमेट्रिक की जरुरत नही होती है जबकि NRC के लिए लोगों को भारतीय नागरिकता का प्रूफ देना अनिवार्य होगा|
    • NPR में नाम दर्ज ना होने पर भी भारतीय नागरिकता पर असर नहीं पड़ेगा जबकि NRC में नाम ना दर्ज होने पर भारतीय नागरिकता साबित होगी नहीं  साथ ही निर्वासन या डिटेंशन झेलना पड़ सकता है|

    आखिर क्यों NPR का विरोध हो रहा है ?

    केंद्र सरकार के NPR के लिए फण्ड आवंटन से ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है| विरोध का मूल कारण इसे NRC से लिंक करना बताया जा रहा है| और कुछ लोग इसे NRC का पहला चरण मान रहे हैं| इन विरोधों के बीच कुछ राज्यों जैसे कि केरल, पश्चिम बंगाल और राजस्थान ने घोषणा की है कि वो अपने राज्य में NPR लागू नहीं होने देंगे|

    लेकिन क़ानूनी रूप से देखे तो राज्यों का नागरिकता सम्बन्धी विषयों में कोई अधिकार नहीं है क्योकि नागरिकता सातवीं अनुसूची की सूची 1 में सूचीबद्ध विषय हैं जो विशेष रूप से संसद के क्षेत्र के अंतर्गत आता हैं| राज्य सिर्फ NPR, NRC या जनगणना के लिए आवश्यक श्रमशक्ति (manpower) उपलब्ध कराते हैं|

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